| फोटो : राजेश उत्साही |
द हिंदुस्तान टाइम्स की एक घोषणा ने हमारा ध्यान
खींचा,जिसमें यह मंशा जताई गई थी कि अखबार की हरेक प्रति से होने वाली आय में से
पांच पैसा भारत के गरीब बच्चों की शिक्षा पर खर्च किया जाएगा। हालांकि यह साफ
नहीं है कि यह राशि किस तरह खर्च की जानी है। यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि
बच्चों की शिक्षा गाहे-बगाहे किया जाने वाला काम नहीं है। स्कूलीकरण एक ऐसा
समग्र अनुभव है जो पाठ्यचर्या की बुनावट के जरिए बहुत सारे व चुनिंदा घटकों से
मिलकर बना होता है,जिसमें ऐसे शैक्षिक लक्ष्यों को हासिल करने की कोशिश की जाती
है ,जिसे कोई भी समाज अलग-अलग वक्तों पर अपने लिए खुद तय करता है।