Showing posts with label आरजू. Show all posts
Showing posts with label आरजू. Show all posts

Wednesday, May 19, 2010

वियोग में एक प्रयोग


ये चार पंक्तियां किसी खास परिस्थिति में ज़ेहन में आईं थीं। जब उनसे उलझने लगा तो कुछ इस तरह से हर बार नए रूप में सामने आ खड़ी हुईं। आपको जो पसंद हो वह चुन लीजिए।