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Wednesday, January 18, 2012

मुलाकात बिनायक सेन से

18 जनवरी, 2012 की दोपहर बिनायक सेन को सुनना और उनसे मुलाकात, इस साल की पहली महत्‍वपूर्ण घटना मानी जा सकती है। बिनायक सेन कलकत्‍ता से लौटे थे और अज़ीमप्रेमजी विश्‍वविद्यालय,बंगलौर में फैकल्‍टी और विद्यार्थियों को संबोधित कर रहे थे। विश्‍वविद्यालय का 50 सीटों वाला ‘साबरमती’ क्‍लास रूम जिसे इस तरह की चर्चा के लिए उपयोग किया जाता है, ठसाठस भरा था। कुछ नहीं तो लगभग डेढ़सौ श्रोता वहां थे। तमाम लोग नीचे फर्श पर ही बैठे थे। कुछ तो बिनायक सेन जहां खडे थे, उनके पैरों के पास ही जम गए थे। हर कोई उन्‍हें सुनना और देखना चाह रहा था।

Sunday, December 26, 2010

बिनायक सेन ही नहीं, मैं भी देशद्रोही हूं.....

               गूगल से साभार 
जब से यह खबर सुनी है कि डॉक्‍टर बिनायक सेन को देशद्रोह के आरोप में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है तब से मन बहुत बैचेन हो रहा है। मन बार-बार यह सवाल कर रहा है कि क्‍या हम सचमुच एक लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में रह रहे हैं।
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बिनायक सेन को मैंने बहुत नजदीक से देखा और जाना है। 1980 के आसपास जब वे होशंगाबाद में मित्र मंडल केन्‍द्र, रसूलिया की डिस्‍पेन्‍सरी में बैठते थे, उनसे कई बार मिलना हुआ। होशंगाबाद जिले में ही पिपरिया के पास स्थित किशोर भारती संस्‍था और मित्र मंडल केन्‍द्र,रसूलिया ने मिलकर शासकीय स्‍कूलों के लिए होशंगाबाद विज्ञान शिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत की थी। इसी कार्यक्रम को आगे ले जाने के लिए बाद में एकलव्‍य संस्‍था की स्‍थापना हुई थी। जिसमें मैंने 26 साल काम किया।