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Friday, January 14, 2011

बेमतलब उंगलियां चलाने से अपना दिमाग भी थकता है और दूसरे का भी......

एक शांत,शांतिप्रिय,स्‍वस्‍थ्‍य,आनन्‍ददायी समाज के निर्माण में बेमतलब की अनगिनत गप्‍पों,भद्दी जानकारियों की कोई भूमिका नहीं है।
दूसरे विश्‍वयुद्ध के दौरान यूरोप में कई जगहों पर एक पोस्‍टर बार-बार चिपकाया जाता था, ‘गप्‍पें मत मारो। इससे जान भी जा सकती है।’ युद्ध के दौरान नागरिक यदि साधारण बातचीत में भी संयम न रखें तो माना जाता था इससे दुश्‍मन को इस पक्ष का कोई सुराग मिल जाएगा और तब न जानें कितनी जानें चली जाएंगी। बेमतलब की हल्‍की-फुल्‍की बातचीत से बचो-य‍ह था संदेश।