मैं चाहता हूँ निज़ामे कुहन बदल डालूं,
मगर ये बात फ़क़त मेरे बस की बात नहीं!
उठो बढ़ो, मेरी दुनिया के आम इंसानों,
ये सबकी बात है, दो चार दस की बात नहीं!
- * ताज भोपाली
मगर ये बात फ़क़त मेरे बस की बात नहीं!
उठो बढ़ो, मेरी दुनिया के आम इंसानों,
ये सबकी बात है, दो चार दस की बात नहीं!
- * ताज भोपाली