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Saturday, April 9, 2011

94..नाजि़म हिकमत की ' उम्‍मीद' मेरी भी है


मैं नज्‍़में लिखता हूं
वे छप नहीं पातीं
लेकिन छपेंगी

मैं एक खुशखबरी वाले खत के इंतज़ार में हूं
मुमकिन है वो मेरे मरने के दिन आए
लेकिन आएगा ज़रूर

दुनिया सरकारों से और दौलत से नहीं चलती
अवाम की हुकूमत से चलती है
अब से सौ साल बाद सही
दुनिया अवाम की हुकूमत से ही चलेगी।
                              0 नाजि़म हिकमत

दिल्‍ली में जंतर-मंतर पर जो हुआ, उससे मुझे तुर्की के इस महान क्रांतिकारी कवि की यह नज्‍़म याद हो आई। इसे उन्‍होंने 1957 में लिखा था। तब मेरे पैदा होने में भी एक साल बाकी था। कहते हैं कवि युग दृष्‍टा होता है। इस समय दुनिया भर में अवाम की ताकत से बदलाव की जो हल्‍की-सी किरण दिखाई दे रही है, हो सकता है उसे सूरज बनने में और पचास बरस लगें, तो भी उम्‍मीद नहीं छोड़नी चाहिए। मैं भी कवि हूं और नाजि़म हिकमत की तरह ही सोचता हूं। उनकी इस नज्‍़म को (जो कि वास्‍तव में एक बयान है) मेरी भी नज्‍़म (बयान) माना जाए। 
                                       0 राजेश उत्‍साही

(नज्‍़म नाजि़म हिकमत की कविताओं के संग्रह ‘देखेंगे उजले दिन’ से साभार। अनुवादक: सुरेश सलिल। चित्र गूगल से साभार। नाजि़म हिकमत के बारे में अधिक जानकारी और उनकी कुछ अन्‍य कविताओं के लिए मेरी पुरानी पोस्‍ट नाजिम हिकमत की कविताएं पर भी एक नजर डाल सकते हैं।)

Wednesday, October 14, 2009

नाजिम हिकमत की कविताएं

बंगलौर आकर मैंने अपने ब्‍लाग गुल्‍लक को सक्रिय करने की कोशिश की। गुल्‍लक के मार्फत ही एक नए दोस्‍त  मिले दिनेश श्रीनेत। यहां वनइंडिया के हिन्‍दी पोर्टल के संपादक थे। थे इसलिए कह रहा हूं कि इस महीने की पहली तारीख को ही उन्‍होंने कानपुर में जागरण में नई जिम्‍मेदारी संभाल ली है। वहां भी उन्‍हें हिन्‍दी पोर्टल पर ही काम करना है। दिनेश ने ही मुझे इस बात के लिए उकसाया कि मैं वनइंडिया के लिए शिक्षा के मुद्दों पर जनसंवाद में लिखूं। मैंने लिखा और अब भी लिख रहा हूं।

एक दिन दिनेश अपने घर ले गए थे। उनके घर की दिलचस्‍प यात्रा के बारे में मैंने अपने दूसरे ब्‍लाग यायावरी में लिखा है। वहां उनकी किताबों की अलमारी में मुझे ऐसी बहुत सी किताबें दिखीं,जिन्‍हें मैं पढ़ना चाहता था। एक किताब मैं साथ ले आया। यह है बीसवीं सदी के महान क्रांतिकारी तुर्की कवि नाजिम हिकमत की कविताओं का हिंदी अनुवाद ‘देखेंगे उजले दिन’। कविताओं का चयन और अनुवाद सुरेश सलिल जी ने किया है। यह संग्रह 2003 में मेधा बुक्‍स से प्रकाशित हुआ है। संग्रह में तिरपन कविताओं के साथ नाजिम हिकमत का विस्‍तृत परिचय भी है।