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| चित्र : गूगल इमेज से साभार |
बीती 11 मई को जानेमाने कथाकार
सदाअत हसन मंटो का जन्म दिन था। 1912 में जन्मे मंटो 42 साल की चढ़ती उम्र में ही सबसे विदा ले गए। लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने जो लिखा उसका आकलन हम अभी तक कर रहे हैं और आने वाले न जाने कितने वर्षों तक करते रहेंगे। उनके भोगे और लिखे को आज पचास साल बाद एक लेखक के तौर पर जब मैं पढ़ता हूं तो लगता है क्या सब लेखक एक ही तरह से सोचते हैं।
आइए देखें कि मंटो ऐसे ही एक सवाल के जवाब में क्या कहते हैं।
मैं क्यों लिखता हूं?