Showing posts with label मनोज कुमार. Show all posts
Showing posts with label मनोज कुमार. Show all posts

Monday, April 16, 2012

जो शेष है, चर्चा में है


ज्‍योतिपर्व प्रकाशन, दिल्‍ली से प्रकाशित मेरे कविता संग्रह ‘वह, जो शेष है’ पर मित्रों ने अपने ब्‍लागों पर समीक्षाएं लिखीं हैं और उसके बहाने से कुछ और चर्चाएं भी कीं हैं। संभव है कि उनकी ये पोस्‍ट आपकी नज़र में आ गई हों। जिन्‍होंने न देखीं हों उनकी सुविधा के लिए लिंक यहां दे रहा हूं। कृपया एक बार अवश्‍य देखें और अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करें।

कुछ मित्र संग्रह अभी पढ़ रहे हैं। उन्‍होंने वादा किया है कि वे भी जल्‍द ही उस पर प्रतिक्रिया लिखेंगे।

                                      0 राजेश उत्‍साही