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| गूगल से साभार |
उन दिनों यानी 1970 के आसपास मध्यप्रदेश के मुरैना
जिले के सबलगढ़ कस्बे में रहता था। कस्बे में केवल एक सिनेमाघर था जिसे हम लक्ष्मी
टॉकीज के नाम से जानते थे। (इंटरनेट पर सर्च करने से पता चलता है कि वह अब भी है।)
जब भी कोई नई फिल्म लगती, एक साइकिल रिक्शा कस्बे की गलियों में घूमता नजर आता।
रिक्शे के दोनों तरफ दो छोटे होर्डिंग लगे होते और उस पर फिल्म के पोस्टर। अंदर
बैठा एक आदमी लाउड स्पीकर पर फिल्म के बारे में, उसके अभिनेता और अभिनेत्री के
बारे में अपनी स्टायलिश आवाज में बताता। वह उन दिनों के लोकप्रिय एनाउंसर अमीन
सयानी से अपने आपको कम नहीं समझता था। जब बोलते-बोलते थक जाता तो ग्रामोफोन पर
फिल्म के गाने भी बजा देता। सबलगढ़ ही नहीं हर कस्बे में लगभग इसी तरह फिल्म का
प्रचार किया जाता था। रिक्शे को देखते ही पहले हम उसके पीछे-पीछे दौड़ते फिल्म
के परचे पाने के लिए और उसके बाद दौड़ पड़ते टॉकीज की ओर वहां लगे बडे होर्डिंग को
देखने के लिए।
