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Sunday, August 7, 2011

दोस्‍तों ने लिखा....(एक)


'उत्‍साही जी,
खुद तो पढ़ते नहीं हैं, दोस्‍तों की रचनाएं और अपनी पढ़वाने के लिए मेल पर मेल भेजते रहते हैं। ईमेल के माध्‍यम से यह काम करना मुझे बिलकुल भी अच्‍छा नहीं लगता। आशा है भविष्‍य में इस तरह के मेल भेजकर आप मुझे परेशान नहीं करेंगे।'